थान्दला एक को दे दिया 15 लाख से ज्यादा शेष अतिथि शिक्षकों को अभी भी नही मिला वेतन

जो चिल्लायेगा नेतागिरी लगाएगा उसका काम हो जाएगा

थान्दला एक को दे दिया 15 लाख से ज्यादा शेष अतिथि शिक्षकों को अभी भी नही मिला वेतन

निप्र। शासन के आदेश सभी अतिथि शिक्षकों को दीपावली पूर्व वेतन का भुगतान किया जाए जिसके चलते वे दीपावली पर अपने घर रोशन कर सके लेकिन शासन के आदेश की अवहेलना का ताजा उदाहरण थान्दला में देखने को मिला है। पर्याप्त आबंटन नही होने का हवाला देते हुए स्थानीय बीईओ ने कुछ अतिथि शिक्षकों को तो भरपेट वेतन दे दिया जबकि सैकड़ों अतिथि शिक्षक को एक माह का वेतन भी नसीब नही हुआ। संकुल प्रभारी व प्राचार्य द्वारा भी एक साथ सभी शिक्षकों का बिल प्रस्तुत नही करना भी उनकी कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है जबकि बीईओ द्वारा व स्थानीय विभाग के बाबुओं द्वारा भी अतिथि शिक्षकों के वेतन भुगतान में कोई पारदर्शिता नही बरती गई है।

एसडीएम विधायक को लगाई गुहार

अतिथि शिक्षकों ने एक जुट होकर मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर विधायक वीरसिंह भूरिया को स्थिति से अवगत करवाया गया व आबंटन होने के बावजूद भी बीईओ द्वारा वेतन नही देने का आरोप लगाया वही कुछ समाजसेवी अतिथि शिक्षक संगठनों ने उक्त बात एसडीएम को भी बताई। एसडीएम ने इस विषय मे बीईओ से जानकारी भी ली लेकिन बीईओ मैडम ने एसडीएम को भी भ्रामित जानकारी दी।

बीईओ ने 90 लाख की राशि के आबंटन को बांटा अपनो में

कभी 8 लाख के आबंटन कभी 11 लाख के आबंटन कभी 15 लाख के आबंटन का कहने वाली बीईओ मैडम के पास 90 लाख के करीब आबंटन आया जिसे वह समायोजित करते हुए सभी अतिथियो के घर दीपावली के दिये जला सकती थी लेकिन उन्होंने ऐसा नही किया व उन्होंने कुछ एक को वेतन दिया जबकि कुछ वेतन को नेतागिरी व चिल्लाने वालो के लिये बचा कर रखा व उन्हें भुगतान किया।

15 लाख से ज्यादा राशि एक ही शिक्षक को

बताया जाता है कि मैडम एक शिक्षिका पर इस कदर मेहरबान हुई कि उन्होंने 15 लाख 91 हजार 407 रुपये एक ही शिक्षिका को दे दिए। उक्त शिक्षिका ने 15 वर्षों का कोर्ट केस जीता था व 3 अक्टोबर को परवलिया संकुल प्राचार्य एरियर (मांग पत्र) विकास खण्ड प्रस्तुत करते है। 7 अक्टोबर को स्वयं शिक्षिका बीईओ मैडम से आबंटन की मांग करती है। 11 तारीख को मैडम आवंटन की मांग भोपाल करती है व 18 अक्टोबर को सारी राशि का भुगतान उक्त शिक्षिका को हो जाता है। यह महज एक पखवाड़े की घटना लाखों अतिथि शिक्षकों के साथ खिलवाड़ है वही शिक्षा विभाग के भ्रष्टाचार में लिप्त होने का प्रमाण है।

ऊपरी दबाव के कारण किया भुगतान

बीईओ मैडम ने दबी जुबान स्वीकार किया कि उक्त राशि का आबंटन बकायदा नोट शीट चलाकर भोपाल वालों ने किया है वही उन्हें भी राशि के भुगतान के लिये प्रेशर देकर कहा गया था। अब यह किस प्रकार का दबाव था व इस दबाव में मैडम ने भी क्यों सहयोग किया यह जाँच का विषय होना चाहिये, क्योंकि अभी तक सैकड़ों शिक्षकों को वेतन नही मिला है जिसके लिये वे आंदोलन का भी मन बना रहे है। इस भ्रष्ट तंत्र के और भी कारनामें है, यदि सही जाँच की जाए तो कई अधिकारी बाबू अपनी नोकरी से हाथ धोकर जेल की सलाखों के पीछे हो सकते है।

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