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सिनेमा बदलता रूप रंग और परिवेश

भारतीय सिनेमा उद्योग शुरु से ही एक चर्चित और समाज का दर्पण दिखाने के जरिया है, या यूं कहें कि सिनेमा ने ही जीने का नजरिया दिखाया, फिर बदलते जीवन और सामाजिक परिवेशों से रूबरू कराया  हर दशक में सिनेमा बदला और बदलते बदलते रंग रूप पटकथा ओर किरदारों को कलात्मक ढंग से बदलते गया।  सफेद रंग का सिनेमा आज खूब गाड़े रंगों मैं बदल गया है।    वर्तमान सिनेमा पूरी तरह व्यवसायिक एवम आंतरिक इच्छाओं एवम  आधुनिकता को रबर की तरह खींचने व जीवन पद्धति को बदलने का काम कर रहा है। वर्तमान तकनीक के युग में इंटरनेट एवम् वेब सीरीज टेलीविज़न की जगह धीरे धीरे लेने लगी है अब बस लाइव वेब सीरीज का बुखार डेंगू मलेरिया की तरह युवाओं में फैल रहा है ।
क्लासिकल कंटेंट का तो जैसे जमाना ही नही रहा, सभी को तड़का मसाला और बोल्ड विषय मनोरंजक लगता है । सिनेमा का स्वरूप इस कदर लोगों के दिल और दिमाग पर असर कर रहा है मानो गैस ठीक करने की दवा इनो हो । पर क्या कभी असल विषय या समाज को जगाने वाला सिनेमा कुछ फूहड़ता ओर नशे के धुएं में धुंधला होता जा रहा है? सिनेमा की शुरुआत तो धूम्रपान  निषेध के विज्ञापनों से शुरु होता है , पर विडम्बना यह है कि आजकल अधिकतर फ़िल्में नायक या किसी भी सिनेमा चरित्र को नशे का बहुत आदि दिखता है। क्या यह सब आज की युवा पीढ़ी पर असर नही करता?  क्या विज्ञापनों को बढ़ावा नही देता?  वेब सीरीज या इंटरनेट वाले चैंनलों ने तो सारी हदें ही पार कर दी है। अगर ये  धीमा जहर है तो इन पर रोकथाम क्यों नही हो रही है,  90 के दशक में फूहड़ता ओर भड़कीले कंटेंट पर थोड़ी रियायत अब एक बड़ा पहाड़ बन गई है । गली गलौच तो एकदम आम सा है । चूंकि सिनेमा से इश्क़ करने वाला बढ़ता युवा है या स्टूडेंट वर्ग है थोड़ी चिंताजनक बात जरूर है। 
   हम अपने बच्चों को थोड़ा इंटरनेट की दुनिया से दूर क्यों नही ले जाना चाहते है या उसका प्रचार बच्चों के विकास या युवाओ में सपने पूरे करने के लिए क्यों नही करना चाहते है, यह एक गंभीर विषय है ।   अपने बच्चों को वेब सीरीज से अत्यंत दूर रखें और बात करते रहे साथ में बैठ कर अच्छे सिनेमा की पैरवी करे तथा घर पर उल जलूल चैनल को हटाकर टेलीविज़न पर कुछ ज्ञान, विज्ञान एवम धर्मिक चैनल दिन में अवश्य कुछ घण्टे चलाये। आपके छोटे छोटे कदम आपको परिवारिक जिम्मेदार बनाते हैं। फूहड़ता पर खुल कर बात करे आधुनिकता या आधुनिक होना अच्छा है । पर हमारे आधार मूल्यों की कीमत पर बिल्कुल भी नही। आगे आप बहुत  समझदार है।
आपके टेलीविज़न पर समय बताने वाला लेफ्ट साइड का सदा बने रहने वाला कोना – आपका अंकित मेड्डी जैन

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